May 20, 2020

प्रेरणा: रेलवे पटरियों की मरम्मत करने बाला गैंगमैन से IPS अफसर बनने तक का सफरनामा

अगर हौसले बुलंद हो तो सफलताएँ भी आपके कदम चूमती है. अगर दिल में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो मंजिलें खुद बा खुद अपने रास्ते खोल देती हैं. ऐसी ढेर सारी पंक्तिया आपने सुना होगा. क्या आपको पता है एक ऐसा इन्सान भी है जो जीता जागता उदहारण है इन पक्तियों का अपने जीवन में सत्य बनाने के लिए. आज हम एक ऐसे सख्स के बारे में बताने जा रहे जिसकी कहानी न सिर्फ प्रेरणादायक है बल्कि कुछ कर गुजरने का साहस भी देती है. ये शख्स है प्रह्लाद मीणा.प्रह्लाद मीणा का जन्म राजस्थान के एक बेहद ही गरीब परिवार में हुआ था, जिसके माता पिता जमींदारों के घर में मजदूरी किया करते थे. पढाई लिखाई से कोसो दूर मीणा के माता पिता को यह कभी गवारा नहीं था कि उनकी तरह उनका बेटा भी मजदूरी करे. वही वजह है की उनके माँ- पिता ने जी जान लगा कर उन्ही पढाई पूरी करवाई।मीणा की 10वीं तक की पढाई गाव के स्कूल से ही कराया. इंजिनियर बनने का सपना रखने वाले मीणा को स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ किन्तु पैसों की कमी के वजह से और आस पास कोई साइंस महाविद्यालय नहीं होने की वजह से उन्हें अपने सपनो को मारकर मानविकी विषय से पढाई करनी पड़ी.आर्थिक तंगी ने मीणा को जिंदगी की प्राथमिकताओं से दूर कर कर दिया. 12वीं कक्षा के दौरान उन्हें खबर मिली कि उनके गाव का एक लड़का रेलवे में गैगमैन बना है. तबसे मीणा ने गैगमैन में भर्ती होने का सोचा और हाशिल भी कर लिया. गैंगमैन की नौकरी मीणा ने स्नातक के दुसरे वर्ष में प्राप्त कर लिया था और स्नातक के बाद ही कर्मचारी चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा उत्तीर्ण किया और रेलवे में ही सहायक अनुभाग अधिकारी का पदभार ग्रहण किया.कुछ ही समय बाद मीणा की आर्थिक हालत अच्छी होने लगी और उन्होंने दिल्ली में अपना एक घर लिया. उसी दौरान मीणा सिविल परीक्षा की भी तैयारी घर से ही करने लगे और अंततः 3 से 4 बार परीक्षा में सम्मिलित होने के बाद साल 2016 में यूपीएससी में अपना परचम लहराया. वर्तमान समय में वो भारतीय पुलिस सेवा में ओड़िसा कैडर के 2017 बैच के अधिकारी हैं.प्रह्लाद मीणा की ये कहानी न सिर्फ उन बच्चों के लिए प्रेरणाश्रोत है जो आर्थिक हालात या समय की कमी वजह से अपने सपनो को छोड़ देते हैं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे जो घर में रहकर सिविल सर्विस में जाना चाहते हैं उनको को मंजिल पाने का विश्वास पैदा करती है.

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aps

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