Jun 4, 2020

aps

Good news

The Antidote to Anxiety

It's easy today to be feeling a lot of anxiety, fear, discontentment, and restlessness. With so much uncertainty about the future, so much job loss, widespread illness, and isolation, you may be battling anxiety as you never have before. Unfortunately, a lot of times we look in all the wrong places for something to fill our inner need for peace and contentment. Some people look to food while others look to alcohol or drugs. Often we look to others to somehow fix it all and make us feel safe.

When the apostle Paul told the Philippians, "Be anxious for nothing,' he was in a prison cell awaiting a trial that could end in his death sentence for preaching the gospel. He had a lot of reasons for anxiety, loneliness, and unhappiness. Paul gave a clear statement as to his antidote for anxiety: "In every situation, by prayer and petition, with thanksgiving, present your requests to God. And the peace of God, which transcends all understanding, will guard your hearts and your minds in Christ Jesus" (Philippians 4:6–7). He was saying, "I'm in this prison, but what's between me and these bars is the peace of God. My peace and joy don't come from my circumstances, but they come from the fact that God is with me in this difficulty. I give thanks that He is the source of my strength, and He will bring me through this to victory."

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https://apsgreen.blogs.com

Jun 2, 2020

Live with Purpose



It's easy to wonder at times what purpose God has for our life, especially during times that are unsettled. We've been so focused on our job, raising our family, and paying the bills that all we see and feel is ordinary. When we look at other people who have special gifts and seem to have a great purpose for living, we can't see God's purpose in our life. But just because we aren't seeing or feeling it doesn't mean it's not there.

Even the great leader Moses needed to come to the place where he recognized his gifts and learned to walk in God's purpose. Circumstances had caused Moses to be raised by Egyptian royalty, but he ended up having to flee in fear into the wilderness where he stayed for forty years. Everything about his life became ordinary. Then suddenly one day God appeared to him and said, "I am sending you to Pharaoh to bring my people the Israelites out of Egypt" (Exodus 3:10). I can only imagine Moses immediately thinking, "You want me to tell the most powerful man in the world to let our people go? Seriously?" Moses pleaded with God to send someone else. "No one will ever believe me. I stutter and have never spoken well. I can't do it."

Read the rest of my blog, "Live with Purpose" here: https://bit.ly/2ZLxVmz

घर बैठे व्हाट्सएप पर साड़ियाँ बेचकर हर महीने 1.5 लाख रूपये कमा रही हैं चेन्नई की शंमुगा..!



अगर आज से पांच साल पहले कोई व्यक्ति चेन्नई की शंमुगा प्रिया को कोई बिज़नेस शुरू करने के लिए कहता, तो वो शायद इसे हंस कर टाल देतीं।
पर आज वही शंमुगा ‘यूनीक थ्रेड्स’ के नाम से साड़ियों का बिज़नेस चला रही हैं, जिसमें वे व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से विक्रेता और ग्राहकों से संपर्क बना कर रखती हैं। इनका नेटवर्क करीब 16 ग्रुप द्वारा फैला हुआ है, जिसमे 250 छोटे विक्रेता, जिनसे एक खुद माल खरीदती हैं और 86,000, ऐसे विक्रेता जुड़े हुए हैं जो इनकी साड़ियाँ आगे ग्राहकों को बेचते हैं।
इस बिज़नेस से ये हर महीने 1.5 लाख रूपये तक कमा लेती हैं और त्यौहारों के समय इस आय में और भी बढ़ोतरी हो जाती है!
पर शंमुगा के लिए यह सब बिल्कुल भी आसान नहीं था!
10 साल तक एचआर के पद पर नौकरी करने वाली शंमुगा को अपनी सास की बिगड़ती तबीयत के चलते नौकरी छोड़नी पड़ी। पर उनके नौकरी छोड़ने के कुछ अरसे बाद ही उनकी सास का निधन हो गया था।
शंमुगा का रिश्ता अपनी सास के साथ बहुत गहरा था। उनके लिए वे उनकी सगी माँ से भी बढ़कर थीं। इसलिए अपनी सास की मौत का उन्हें बहुत सदमा लगा।




शंमुगा प्रिया की सास (साभार: शंमुगा)

उनकी ज़िन्दगी जैसे रुक-सी गयी थी, पर घर के हालात कुछ ऐसे हो गये थे कि उन्हें अपनी नौकरी छोड़ कर उन सभी जिम्मेदारियों को संभालना था, जो अब तक इनकी सास संभाल रही थी। उस समय उनका बेटा तीन महीने का था और उनके पति, हरी दिल्ली में जॉब से संबंधित किसी ट्रेनिंग में व्यस्त थे।
कॉलेज से ग्रेजुएट होते ही उन्होंने नौकरी करना शुरू कर दिया था। इसलिए अब इस तरह घर में खाली बैठना उन्हें खल रहा था और इससे उनका दुःख सिर्फ़ बढ़ रहा था।
द बेटर इंडिया को वे बताती हैं, “इस दौरान मेरे पति ने मुझे बताया कि किस तरह उनकी माँ ने घर-घर घूम कर साड़ी बेचीं और उन्हें व उनके भाई-बहनों को अकेले पाला। अपने हिस्से के संघर्षो का सामना करने के बाद भी उन्होंने ध्यान रखा कि उनके बच्चों पर कोई आंच न आये। उनकी कहानी ने मुझे इतना प्रेरित किया कि मैंने भी एक कोशिश करने की ठानी।”
साल 2013 में; 30,000 रुपये की मामूली लागत के साथ शंमुगा प्रिया ने इस व्यवसाय की शुरुआत की और साड़ियाँ खरीदने के लिए स्थानीय बाज़ार के चक्कर काटने लगीं।




शंमुगा प्रिया

वे याद करती हैं, “मैंने घर पर साड़ियाँ लगायी, और पड़ोसियों को बता दिया। उन पड़ोसियों ने अपने दोस्तों और जान-पहचान वालों तक यह बात पहुंचाई। लोगो का आना-जाना जारी रहा, पर मैं देखती कि लोग घंटों तक साड़ियाँ देखते और दिन भर घर में आते-जाते रहते थे, और सिर्फ़ एक साड़ी खरीदते। यह बहुत तनावपूर्ण हो गया था और मैं अक्सर सोचती कि कहीं मैंने गलत निर्णय तो नहीं ले लिया।”
उम्मीद की किरण तब जागी, जब उन्होंने अपनी कॉलेज की एक दोस्त को कुछ साड़ियों की फोटो खींचकर भेजी, जिसने खुद आगे बढ़ कर व्हाट्सएप पर अपने एलुमनी ग्रुप में तस्वीरें भेज दीं।
शंमुगा प्रिया गर्व से बताती हैं, “एक सप्ताह के भीतर, मेरे घर पर रखा पूरा माल बुक हो गया था। मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैंने अपना पहला पैकेज कूरियर किया था। व्यापार करने का यह तरीका बहुत नया था, पर मेरे लिए यह ‘क्लिक’ कर गया और फिर मैंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।”
फिर उन्होंने घर बुला कर कपड़े दिखाने का सिलसिला बंद कर दिया और साड़ियों की बिक्री केवल व्हाट्सएप द्वारा करने लगी। उनसे कई ऐसे ग्राहकों ने भी संपर्क किया जो उनकी साड़ियों को आगे बेचना चाहते थे। इस प्रस्ताव को शंमुगा ने ख़ुशी- ख़ुशी स्वीकार कर लिया।
वे बताती हैं, “इनमें से अधिकतर गृहणी, कॉलेज के विद्यार्थी या कई छोटे स्तर के व्यापारी थे, जो मेरी साड़ियों को बेच कर कुछ अच्छा कमाना चाहते थे। मेरे हित में जो बात काम कर रही थी, वह थी मेरे कपड़ों की विशिष्टता, जिसे मैं खुद चुनती और स्टाइल करती थी।”
कई ग्राहकों से बात करने के बाद उन्होंने ‘यूनिक थ्रेड्स’ को एक व्यापक मंच देने का फैसला किया और फिर 8 मार्च 2013 को यह फेसबुक पर भी आ गया।




साभार: शंमुगा प्रिया

इस कदम से उनकी बिक्री काफ़ी बढ़ गयी और उन्होंने फेसबुक पर ही ‘री सेलर’ ग्रुप भी बनाया, जिसमे आज 86,000 सदस्य हैं!
वे बताती हैं कि इन ग्रुप्स में लोग किसी विशेष स्टाइल के लिए आग्रह करते हैं या फिर आपस में संपर्क करते हैं। हर एक तरीके से उनका नेटवर्क बढ़ता है। उन्हें ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और नीदरलैंड से भी आर्डर मिले हैं।
जहाँ पहले शंमुगा प्रिया स्थानीय दुकानों से साड़ियाँ खरीदती थी, अब उन्हें सीधा उत्पादकों से लेने की ज़रूरत महसूस होने लगी।
उन्होंने आगे बताया, “इससे मुझे यात्रा करने और उत्पादकों से मिलने का मौका मिला। इसके साथ ही मैंने अलग-अलग तरह के कपड़ों के बारे में और साड़ी बिक्री के व्यवसाय के बारे में बहुत कुछ जाना। मैं तह-ए–दिल से मानती हूँ कि थोक विक्रेताओं ने मुझे बहुत सहयोग दिया क्योंकि आम तौर पर वे आगे से इतने सहायक नहीं होते और इससे नए उद्यमियों के लिए मुश्किल होती है। पर मेरे मामले में इनके मार्गदर्शन ने अहम् भूमिका निभायी है।”
इनकी कहानी इतनी प्रसिद्ध हुई कि व्हाट्सएप ने इस पर एक शोर्ट फिल्म भी बनायी है, आप यहाँ देख सकते हैं।




व्हाट्सएप के प्रेसिडेंट से मुलाक़ात

ऑनलाइन मार्किट के चलते बिज़नेस में पिछल कुछ सालों में तेज़ी आई है, पर साथ ही प्रतिद्विन्दी भी बहुत हैं। शंमुगा प्रिया मानती है कि उनकी यूएसपी उनके कपड़ों का सबसे अलग होना है, जो कई बार ‘ट्रेंडसेटर’ बन जाते हैं।
वे बताती हैं, “ उदाहरण के लिए, आज कलमकारी की मांग दुनिया भर में है। पर जब हमने शुरुआत की थी, तब ऐसा नहीं था। मैं मानती हूँ कि हमारे प्रोडक्ट्स और साथ ही लोगों द्वारा इनकी सराहना, इस सबने हमारे हित में काम किया है।”
वर्तमान में, शंमुगा प्रिया के पास 6 लोगों का स्टाफ है और वे कोवुर में इनके घर के फर्स्ट फ्लोर से काम करते हैं। सारी साड़ियाँ और अन्य सामान यहाँ इकठ्ठा होते हैं और यहीं से पैक कर के भेजे जाते हैं। आमतौर पर ये प्रतिदिन कम से कम 80 साड़ियाँ बेचती हैं और त्योहारों में यह गिनती दुगनी हो जाती है।
कई लोगो ने उन्हें सलाह दी है कि शंमुगा प्रिया को व्हाट्सएप से आगे बढ़ना चाहिए और बेहतर बिज़नेस के लिए व्यापक रूप से इसे बढ़ाना चाहिए। पर वे कहती हैं कि बिज़नेस के नज़रिए के साथ उन्होंने शुरुआत की ही नहीं थी।




शंमुगा के घर में ही स्टोर

अंत में वे बताती है, “मुझे लगता है कि सब कुछ एकदम सामने होना ही ज़रूरी नहीं है। बिज़नेस को इस तरह से भी चलाया जा सकता है, जैसा कि यूनीक थ्रेड्स ने पांच सालों में साबित किया है।”
शंमुगा प्रिया का दृढ़ विश्वास, कड़ी मेहनत और अपने काम के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने ही उनके बिज़नेस को ऊँचाईयों तक पहुँचाया है।

Jun 1, 2020

8000 रुपये की मामूली रकम, पर आइडिया दमदार था आज है करोड़ों का टर्नओवर..

बहुत कम लोग ही हैं जो अपनी अच्छी-खासी कॉर्पोरेट नौकरी को छोड़कर एक उद्यमी बनने का ख्वाब देखते हैं, लेकिन बेंगलुरु के 23 साल के सौरव मोदी ने बिलकुल कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट की जॉब छोड़कर बिसनेस में हाथ आजमाने की कोशिश की और आज एक सफल उद्यमी हैं।

13 साल बाद आज जब वे पलट कर पीछे देखते हैं तो अपने 2015-16 के 6.5 करोड़ के टर्न-ओवर के साथ उनके मन में कोई पछतावा नहीं है। आज उनकी कंपनी बैग्स, बेल्ट, वॉलेट्स जैसे जूट प्रोडक्ट्स और कॉर्पोरेट गिफ्ट्स बनाती है। उनके प्रोडक्ट्स भारत के लगभग सभी रिटेल चेन में उपलब्ध हैं और कुछ यूरोपियन देशों में भी ये प्रोडक्ट निर्यात किये जाते हैं। बिना किसी शुरूआती अनुभव के शुरू कर उन्होंने धीरे-धीरे खुद से ही सब-कुछ सीखा और आज सफ़लता उनकी कदम चूम रही।

सौरव एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं और उन्होंने अपना बिज़नेस सिर्फ 8000 रूपये से शुरू किया वो भी अपनी माँ से कर्ज लेकर। उन्होंने सबसे पहले 1800 रुपये की एक सेकंड-हैण्ड सिलाई मशीन खरीदकर और एक पार्ट टाइम टेलर को जॉब में रखकर एक किराये के 100 स्क्वायर फीट के गेराज से अपना यह बिज़नेस शुरू किया। उनका यह शुरुआती दौर काफी मुश्किलों भरा था। सौरव 2007 में बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, जब उनके 30 काम करने वालों ने स्ट्राइक कर दी पर उन्होंने इस कठिन समय को भी अपने साहस और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर झेल गए। आज उनके पास करीब 100 से ज्यादा काम करने वाले लोग हैं और उनकी यह फैक्ट्री बेंगलुरु के कामाक्षीपाल्या में 10,000 स्क्वायर फीट क्षेत्र में फैल चुका है।

क्राइस्ट कॉलेज से कॉमर्स में ग्रेजुएशन करने के पश्चात् सौरव ने अर्न्स्ट एंड यंग कंपनी में टैक्स एनालिस्ट की नौकरी ज्वाइन की और वहां उन्होंने लगभग डेढ़ साल गुजारे। इसके बाद वे यूएस से एमबीए करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से उनका सपना अधूरा ही रह गया।

मैंने कैलिफ़ोर्निया की यूनिवर्सिटी से एमबीए के लिए अपनी सीट सुरक्षित कर रखा था पर पीछे मुड़कर देखने से यह लगता है कि शायद यही मेरी नियति थी – जूट के सामान बनाना — सौरव मोदी

कुछ दिनों तक कॉर्पोरेट जॉब करने के बाद सौरव अपने पिता के बिज़नेस में लग गए। दो साल पिता के साथ काम करने के बाद कुछ नया करने की चाह में उन्होंने पिता का बिज़नेस छोड़ दिया। पिता ने भी उनके इस निर्णय का सम्मान किया क्योंकि वे खुद भी एक सेल्फ-मेड आदमी थे।

अपने पिता के सुझाव पर उन्होंने जूट के बिज़नेस में अपना भाग्य आजमाया क्योंकि बेंगलुरु में एक भी जूट प्रोडक्ट्स का उद्योग नहीं थाऔर फिर उनका यह आईडिया जस्ट जूट के नाम से उभर कर सामने आई। पिता के कस्टमर के द्वारा ही उनकी कंपनी को पहला ऑर्डर 500 जूट बैग बनाने का मिला। उनका सबसे बड़ा ऑर्डर 70,000 रूपये का था जो एककैंडल एक्सपोर्टर ने उन्हें दिया और फिर इस तरीके से उनका यह बिज़नेस चल पड़ा। और जैसे-जैसे उनके पास पैसे आते गए उनका बिज़नेस बढ़ता चला गया।  

साल 2008 में उनका विवाह निकिता नाम की एक लड़की से हुआ, जो डिजाईन बैकग्राउंड से ताल्लुक रखती थी और इसलिए निकिता ने भी इस बिज़नेस को आगे बढ़ाने में सौरव की पूरी मदद की। आज उनके इस जूट बिज़नेस में विस्तृत कलेक्शन के हैंडबैगस, स्लिंग्स, वॉलेट्स, लैपटॉप बैग्स, और ऐसे बहुत सारे जरूरतमंद प्रोडक्ट्स हैं। इसके अलावा कुछ ऑर्गेनिक कॉटन और पोल्यूरेथेन जैसे फैब्रिक्स में प्रयोग करके उन्होंने और भी बहुत सारे प्रोडक्ट्स बनाये हैं। सौरव ने अपना बिज़नेस जस्ट जूट का लक्ष्य निर्धारित किया है कि आने वाले दस सालों में उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 100 करोड़ हो जायेगा।

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Live with Purpose

It's easy to wonder at times what purpose God has for our life, especially during times that are unsettled. We've been so focused on our job, raising our family, and paying the bills that all we see and feel is ordinary. When we look at other people who have special gifts and seem to have a great purpose for living, we can't see God's purpose in our life. But just because we aren't seeing or feeling it doesn't mean it's not there.

Even the great leader Moses needed to come to the place where he recognized his gifts and learned to walk in God's purpose. Circumstances had caused Moses to be raised by Egyptian royalty, but he ended up having to flee in fear into the wilderness where he stayed for forty years. Everything about his life became ordinary. Then suddenly one day God appeared to him and said, "I am sending you to Pharaoh to bring my people the Israelites out of Egypt" (Exodus 3:10). I can only imagine Moses immediately thinking, "You want me to tell the most powerful man in the world to let our people go? Seriously?" Moses pleaded with God to send someone else. "No one will ever believe me. I stutter and have never spoken well. I can't do it."

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मामूली बस कंडक्टर की बेटी कड़ी मेहनत से बनी थी IPS अफसर, नाम से ही कांप उठते हैं अपराधी...

पटना: IPS Success Story: आज हम बात कर रहे हे एक ऐसी लड़की की जिसने बचपन में ही यह सपना देख लिया था कि बड़े होकर उसे पुलिस में ही जाना है और देश की सेवा करनी है। अपने जज्बे को इसने कभी कम नहीं होने दिया और आगे चलकर उसने अपना सपना पूरा भी किया, बता दें वो लड़की IPS ऑफिसर बन गई और इस लड़की को सर्वेश्रेष्ठ आईपीएस ट्रेनी भी चुना गया था। एक बस कंडक्टर के बेटी ने कड़ी मेहनत से खुद को इस काबिल बनाया और अपराधियों के लिए काल बन गई 

aps- सक्सेज स्टोरी में आज हम आपको IPS अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री (Shalini Agnihotri IPS)  की सफलता की कहानी 

हिमाचल के ऊना के दूरदराज गांव ठठ्ठल की आईपीएस अधिकारी शालिनी अग्निहोत्री एक ऐसा नाम है जो ना केवल सभी के लिए एक मिसाल है बल्कि अपराधियों का काल भी हैं। इनके काम करने का ढंग ऐसा है की नाम से ही नशे के कारोबारी घबराते हैं। बहुत ही साधारण परिवार में पली बढ़ी शालिनी ने कड़ी मेहनत के बाद यह मुकाम हासिल किया है। कुल्लू में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने नशे के सौदागरों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था।

 30 साल की शालिनी ने IPS की सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी का खिताब अपने नाम किया था। ऐसा करके उन्होने ना सिर्फ अपने घर परिवार का बल्कि अपना गाँव का अभी नाम ऊंचा किया। जिसकी वजह से उन्हे प्रधानमंत्री के प्रतिष्ठित बेटन और गृह मंत्री की रिवॉल्वर भी दी गई।

आपको बता दें की IPS अधिकारी शालिनी के पिता रमेश एचआरटीसी बस में एक कंडक्टर के तौर पर काम करते हैं और उनकी मां हाउस वाइफ है। हिमाचल के ऊना के ठठ्ठल गांव की रहने वाली शलिनी का जन्म 14 जनवरी 1989 में हुआ था। उनके बार में बताया जाता है की शलिनी को बचपन से उनके माता पिता ने कभी किसी भी चीज़ के लिए माना नहीं किया। उन्हे हर वो आजादी दी जो वो चाहती थी।

  वो बचपन से ही अपने देखे सपने को पूरा करने में लगी रहीं। शालिनी हमेशा से ही मेहनती छात्र में गिनी जाती थी। स्कूल में उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहता था। उनकी शिक्षा धर्मशाला के DAV स्कूल से हुई है और आगे की पढ़ाई उन्होने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से की है झन से उन्होने अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

आज IPS अधिकारी बन चुकी शालिनी बताती हैं की जब उन्होंने UPSC की तैयारी करने के बारे में सोचा तो इसका जिक्र किसी से नहीं किया था। वो जानती थी ये देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है और ऐसे बहुत से लोग हैं जो कई वर्षों की कठिन मेहनत के बाद भी इस परीक्षा को पास नही कर पाते हैं। मगर यहां पर शलिनी के दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास ने उन्हे बहुत हिम्मत दी और मई 2011 में उन्होंने UPSC की परीक्षा दी थी जिसका इंटरव्यू मार्च 2012 में हुआ और परिणाम भी उसी वर्ष मई में आ गया।

 जब UPSC परीक्षा का फ़ाइनल परिणाम आया तो उसमे शलिनी को ऑल इंडिया लेवल पर 285वीं रैंक मिली थी। इसके बाद उनका सफर शुरू हो गया था जब दिसंबर 2012 में हैदराबाद में उन्होने ट्रेनिंग ज्वॉइन की और उनको मिला 148 का बैच, जिसमें वह टॉपर रहीं। शालिनी अपनी मेहनत और लगन के दम पर ना केवल आईपीएस अधिकारी बनी बल्कि ट्रेनिंग (65वां बैच) के दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ ट्रेनी का खिताब से भी नवाजा गया।

 सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर ट्रेनी आफिसर होने के कारण उन्हें देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा सम्मानित भी किया गया। अपनी उपलब्धियों के चलते वह राष्ट्रपति की मौजूदगी में हुए पासिंग आउट परेड में आकर्षण का केन्द्र रहीं।

<p>ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें उनकी पहली पोस्टिंग हिमाचल में हुई, जब उन्होंने कुल्लू में पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला तो अपराधियों में दहशत हो गई। उन्होंने नशे के सौदागरों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था जिसके कारण वो सुर्खियों में रहीं।</p>

<p>&nbsp;</p>

<p>शालिनी ने बताया कि हम दो बहनें और एक भाई हैं। बड़ी बहन डॉक्टर है, जबकि छोटा भाई इंडियन आर्मी में है। बस्ती जिले के एसपी संकल्प शर्मा से शालिनी की शादी हुई। शालिनी को बचपन से पुलिस अधिकारी बनने का शौक था। शालिनी का कहना है कि बेटियों को खूब पढ़ाओ-लिखाओ, अब लड़कियां लड़कों से किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, लड़कियां लड़कों से आगे निकल रही हैं।</p>

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें उनकी पहली पोस्टिंग हिमाचल में हुई, जब उन्होंने कुल्लू में पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला तो अपराधियों में दहशत हो गई। उन्होंने नशे के सौदागरों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया था जिसके कारण वो सुर्खियों में रहीं।

 शालिनी ने बताया कि हम दो बहनें और एक भाई हैं। बड़ी बहन डॉक्टर है, जबकि छोटा भाई इंडियन आर्मी में है। बस्ती जिले के एसपी संकल्प शर्मा से शालिनी की शादी हुई। शालिनी को बचपन से पुलिस अधिकारी बनने का शौक था। शालिनी का कहना है कि बेटियों को खूब पढ़ाओ-लिखाओ, अब लड़कियां लड़कों से किसी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं, लड़कियां लड़कों से आगे निकल रही हैं।



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15 हज़ार की नौकरी छोड़ अपने आइडिया के साथ बढ़े आगे, 3 महीने में ही हुआ 5.5 लाख का मुनाफ़ा जिंदगी में सफल होना तो हर कोई चाहता है लेकिन सफलता हास...