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May 20, 2020
मिसाल: छोटे से गैराज से की थी बिजनेस की शुरूआत, आज करोड़ों का है टर्नओवर
वो कहते हैं न कि अगर कोई व्यक्ति अपने मन में कुछ ठान ले तो उसे पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। बस आवश्यकता होती है तो दृढ़ निश्चय, मेहनत व धैर्य की जो कि हर किसी के पास नहीं होता लेकिन हां जिसके पास होता है वो इस दुनिया में अपने सारे सपने जरूर पूरी कर लेता है। इसके लिए सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि हमारा सपना क्या है और हम किस सपने को पूरा करने के लिए सबकुछ भूला सकते हैं।दरअसल आज हम आपसे ऐसी बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो कहानी हम आपको सुनाने वाले हैं वो कुछ ऐसे ही सफल व्यक्ति की है, जिनके बारे में हम बात कर रहे हैं वो 68 साल के रविन्द्र किशोर सिन्हा जी हैं। इनकी सफलता की कहानी कई लोगों को प्रेरणा देती है क्योंकि इन्होने अपना बिजनेस एक छोटे से गैराज से शुरू किया था जिसके बाद आज ये एशिया के सबसे बड़े मानव शक्ति से युक्त सुरक्षा फर्म्स के संचालक है। यह अपने आप में प्रेरणादायक है।यही नहीं आपको ये भी बता दें कि इनका जन्म और पालन-पोषण पटना के एक निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उन्होंने अपने छह भाई-बहनों के साथ-साथ सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। खास बात तो यह है कि राजनिति विज्ञान से उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद ये अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पार्ट टाइम नौकरी करने लगें।ये नौकरी जर्नलिज्म में अपराध व क्राइम पर काम करने की थी। उस दौरान भारत-पाकिस्तान तनाव की रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें बिहार रेजीमेंट के बॉर्डर पोस्ट पर रुकने का मौका मिला तब उन्हें सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस सर्विस के बारे में एक आईडिया आया।यही नहीं साल 1973 में जयप्रकाश नारायण की राजनैतिक सक्रियता से सहानुभूति रखने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। जिसके बाद वो नई नौकर ढूंढ़ने लगे। उस समय उनके कुछ दोस्त कंस्ट्रक्शन के बिज़नेस में थे और उन्हें अपने प्रोजेक्ट साइट के लिए गार्ड की जरुरत थी।उस समय सिन्हा जी ने तब उन्हें रिटायर्ड सैनिक दिए और तब उन्हें यह पता लगा कि प्राइवेट सिक्योरिटी एजेंसीज में भी बिज़नेस के मौके हैं। फिर क्या था इससे उनके दिमाग में ये आइडिया आया कि वो खुद कंपनी खोल सकते हैं और फिर साल 1974 में पटना में एक छोटे से गैरेज को लीज़ पर लेकर “सेक्युरिटी और इंटेलिजेंस सर्विसेज” (SIS इंडिया लिमिटेड) नामक कंपनी खोली।जिसके बाद कंपनी के शुरूआती साल में उन्होने 250 सेना के आदमी रखे और लगभग एक लाख रूपये का कारोबार हासिल किया। फिर 1988 में SIS इंडिया लिमिटेड ने अपना एक नया विभाग खोला; ट्रेनिंग अकादमी का, जहाँ लाखों की संख्या में सिक्योरिटी गार्ड्स को ट्रेनिंग दी जाती थी।देखते ही देखते कुछ समय बाद साल 2005 में इनकी कंपनी का टर्न-ओवर 25 करोड़ के पास पहुँच गया। उन्होंने दूसरे देशों में भी कंपनी खोलने का निश्चय किया। 2008 में SIS इंडिया लिमिटेड ने ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी कंपनी चब-सिक्योरिटी को 1000 करोड़ में खरीद लिया। आज SIS एशिया की सबसे अधिक मैनपॉवर वाली सिक्योरिटी फर्म बन गई है।आज इनके यहाँ लगभग 70,000 कर्मचारी काम करते हैं। यही नहीं गौर करने वाली बात तो यह है कि आज इनकी ये कंपनी 2000 से भी अधिक कॉर्पोरेट इंडस्ट्रीज को सिक्योरिटी प्रदान कर रही है जिसमें टाटा स्टील, टाटा मोटर और ICICI बैंक शामिल हैं। यही वजह है कि इस समय में SIS इंडिया लिमिटेड का मार्केट कैप क़रीब 8000 करोड़ का है।
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aps
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