अगले ही दिन उसकी मां ने उसका एडमिशन दूसरे स्कूल में करवा दिया। उस लड़के ने मन लगाकर पढ़ाई की और एक दिन अपनी मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल की। वह लड़का कोई और नहीं महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन थे। मां बूढ़ी हो चुकी थीं। एक दिन अचानक ही उनकी मृत्यु हो गयी। तभी अचानक उन्होंने अपनी मां की अलमारी खोली, और उनके सामानों को देखने लगे। उनकी नजर एक पत्र पर पड़ी। यह वही पत्र था, जो उसकी टीचर ने उसकी मां को देने के लिए दिया था।
जानें उस पत्र में क्या लिखा था?
उस पत्र में लिखा था कि आपको ये बताते हुए हमे बहुत दुख है कि आपका बेटा पढ़ाई-लिखाई में बहुत ही कमजोर है। जिस तरह से इसकी उम्र बढ़ रही है, उस तरह से इसकी बुद्धि का विकास नहीं हो रहा है। इसलिए हम इसे स्कूल से निकाल रहे हैं। आप इसका एडमिशन किसी दूसरे स्कूल में करवा दीजिये। नहीं तो घर में इसे पढ़ाइए। जिस प्रकार पत्र पढ़कर आइंस्टीन की मां ने अपने बेटे की सोच बदल दी। ठीक उसी प्रकार आप भी अपनी सोच बदल सकते हैं। खुद सोचिए कि वो लड़का तो वही था, फिर वो आइंस्टीन कैसे बना? सिर्फ अपनी सोच से। उन्होंने मान लिया कि वो खास है। हम अपने बारे में क्या सोचते हैं, ये हमारी जिंदगी में बहुत मायने रखता है।
काम की बात
1. खुद के बारे में हमेशा अच्छा और पॉजिटिव सोचें, आपकी सफलता में इसका महत्वपूर्ण रोल है।
2. आप बेहद खास हैं, इस बात को अपने दिलो दिमाग में गहरे से बिठा लें।
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I hope you are a healthy and happy be careful