व्यक्ति ने संत से कहा, बाबा मुझे अपना शिष्य बना लें. मैं जीवन से बहुत परेशान हो गया हूं और दुखी हूं. संत बोले ठीक है, तुम मुझे अपनी परेशानी बताओ. व्यक्ति ने कहा, बाबा मेरे जीवन में बहुत परेशानी है. एक समस्या खत्म नहीं होती और दूसरी शुरू हो जाती है. इस कारण में तनाव और दुखी रहता है और किसी काम में सफलता नहीं मिल पाती है.
बाबा ने कहा कि ठीक है, मैं तुम्हारी परेशानियों का हल बताता हूं. तुम मेरे साथ चलो. संत व्यक्ति को लेकर एक नदी के पास पहुंचे. संत ने व्यक्ति को नदी के किनारे खड़ा कर दिया और बोले हमें ये नदी पार करनी है. यह कहकर संत वहीं खड़े हो गए. व्यक्ति भी संत के साथ वहीं खड़ा हो गया.
थोड़ी देर बाद उसने कहा, बाबा हमें नदी पार करनी है तो हम यहां क्यों खड़े हैं? संत ने कहा हम नदी के सूखने का इंतजार कर रहे हैं. जब नदी सूख जाएगी तो हम इसे आसानी से पार कर सकते हैं. व्यक्ति बहुत आश्चर्य होकर बोला, बाबा आप ये कैसी बात कर रहे हैं, नदी का पानी कैसे और न जाने कब सूखेगा. हमें नदी को इसी समय पार करना चाहिए.
संत ने कहा, मैं भी तुम्हें यही समझाने के लिए यहां लाया हूं, कि जीवन में समस्याएं तो आती ही रहेंगी. हमें रुकना नहीं चाहिए बल्कि लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए, तभी हम उसे हल कर पाएंगे और आगे बढ़ पाएंगे. व्यक्ति को संत की बात समझ आ गई. उसने अपनी सोच बदली और उसी दिन निश्चय कर लिया कि परिस्थित कैसी भी हो, समस्या कोई भी हो उसका हल करते हुए सफलता की ओर आगे बढ़ना है.
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